
POCSO Act यानी लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012; 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों (लड़के-लड़कियां दोनों) को यौन शोषण, छेड़छाड़, पोर्नोग्राफी से बचाने का विशेष कानून है। यह लिंग-तटस्थ है और अपराध की रिपोर्ट पर तुरंत FIR दर्ज होती है। 2019 संशोधन से मौत की सजा जैसे कड़े प्रावधान जोड़े गए।
POCSO की मुख्य धाराएं और सजाएं
POCSO एक्ट की धाराएं अपराध की गंभीरता के आधार पर सजाएं तय करती हैं। सभी अपराध गैर-जमानती हैं, विशेष POCSO अदालतों में ट्रायल होता है।
| धारा | अपराध का प्रकार | सजा का प्रावधान |
| धारा 3-4 | प्रवेशकारी यौन हमला (Penetrative Sexual Assault) | न्यूनतम 10 वर्ष कैद; 16 वर्ष से कम बच्चे पर 20 वर्ष कैद, उम्रकैद या मौत + जुर्माना। |
| धारा 5-6 | गंभीर प्रवेशकारी यौन हमला (Aggravated) | न्यूनतम 20 वर्ष कैद, उम्रकैद या मौत + जुर्माना। |
| धारा 7-8 | यौन हमला (अनुचित स्पर्श आदि) | 3 से 5 वर्ष कैद + जुर्माना। |
| धारा 9-10 | गंभीर यौन हमला (Aggravated Sexual Assault) | 5 से 10 वर्ष कैद + जुर्माना। |
| धारा 11-12 | यौन उत्पीड़न (इशारा, टिप्पणी) | अधिकतम 3 वर्ष कैद + जुर्माना। |
| धारा 13-14 | पोर्नोग्राफी में बच्चों का उपयोग | 5 से 10 वर्ष कैद + जुर्माना। |
| धारा 15-16 | पोर्नोग्राफी का भंडारण/वितरण | 3-5 वर्ष (पहली बार); 5-10 वर्ष (दोबारा) + जुर्माना। |
FIR के 24 घंटे में मेडिकल जांच और बच्चे का बयान वीडियो रिकॉर्डिंग से लिया जाता है।
2019 संशोधन: कठोर प्रावधान
2019 POCSO Amendment से मौत की सजा (धारा 6), पोर्नो स्टोरेज (धारा 15) और दवा से यौन अपरिपक्वता बढ़ाने पर सजा जोड़ी गई। विशेष अदालतें बच्चे-अनुकूल हैं, ताकि ट्रॉमा कम हो।
2026 ट्रेंडिंग अपडेट्स
सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में POCSO दुरुपयोग पर चिंता जताई, किशोरों के सहमति वाले रिश्तों (17-19 साल) में। रोमियो-जूलियट क्लॉज जोड़ने की मांग उठी, जो उम्र के करीब रिश्तों को छूट देगा। पटना NEET छात्रा केस में CBI ने POCSO लागू किया।
POCSO केस आंकड़े 2026
2.24 लाख POCSO केस कोर्ट में लंबित, दिल्ली में 4.5 साल औसत समय। 2016-2023 में पीड़ित दोगुने (99% लड़कियां), अपराध बढ़ रहे।
चुनौतियां और समाधान
दुरुपयोग से बेगुनाह फंसते हैं, लेकिन ज्यादातर केस साबित नहीं होते। एनजीओ जागरूकता फैला रहे हैं। त्वरित ट्रायल, बेहतर जांच और सुधार जरूरी।
